સ્વસ્તિવાચન અને શ્લોક.

स्वस्तिक मंत्र या स्वस्ति मंत्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो। जगत, परिवार और स्वयं के कल्याण के लिए, शुभ वचन कहना ही स्वस्तिवाचन है। हिंदू धर्म में वैदिक काल से चले आ रहे पूजा पाठ से जुड़े अनेक रिवाज़ हैं। हर पूजन से पहले स्वस्तिवाचन मंत्र का पाठ का महत्व ऐसा माना जाता है कि मंत्रोच्चार से नेगेटिव एनर्जी खत्म हो जाती है और इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। यह मंगल पाठ अवश्य करना चाहिए जिससे सभी देवी-देवताओं को जाग्रत कर प्रशन्न कर सकें। ————— ► इन मुख्य मंत्रों के लिए सीधा यहाँ क्लिक करें ☛ ☛ 00:00:15 |► आ नो भद्राः क्रतवो …… ☛ 00:02:26 |► स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः …… ☛ 00:04:04 |► ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: ….. ☛ 00:04:47 |► ॐ गणानां त्वा गणपति ग्वँग् …… —————- || सम्पूर्ण स्वस्तिवाचन || मंगलाचरण ||

jitante stotram is one of the oldest slokams. Jitante stotram is a Rigveda khilam meaning an unfrequented portion. The actual secret meaning, of the mantram called Jitante, was expounded by that omniscient sage bhagavan Saunaka. Sections of Jitante stOtram are recited at the end of Bhagavath AarAdhanam.

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